गांव की चौपाल से उठी पुकार: खंडहर में बैठा रामलला, सुनने वाला कोई नहीं

ब्यूरो रिपोर्ट सीतापुर: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में जनपद राम मंदिर के उत्सव में डूबा है, लेकिन सिधौली क्षेत्र के उच्चखेरा अजई गांव में माहौल बिल्कुल विपरीत है। यहां स्थित रामलला अनंत कुटी मंदिर वर्षों की उपेक्षा के कारण खंडहर में तब्दील हो चुका है। गांव की चौपाल से लेकर खेतों तक एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या यह रामलला हमारे नहीं हैं? जहां कभी आरती होती थी, वहां आज सन्नाटा ग्रामीण बताते हैं कि यह मंदिर कभी पूरे इलाके की आस्था का केंद्र था। सुबह-शाम आरती, त्योहारों पर मेले और कथा-कीर्तन से गांव गुलजार रहता था।

आज हालत यह है कि ताले टूट चुके हैं, छतें गिर रही हैं और मंदिर में प्रवेश करना भी जोखिम भरा हो गया है।
आस्था के स्थल पर नशे का साया ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि शाम ढलते ही मंदिर परिसर में नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है।
“जहां बच्चे राम नाम सीखते थे, वहां अब गाली-गलौज सुनाई देती है,”—यह पीड़ा गांव की बुजुर्ग महिलाओं की आंखों में साफ झलकती है।

इतिहास होते हुए भी पहचान शून्य स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर कोटरा रियासत काल का है, जिसे राजा रघुवर दयाल ने संत श्री रामलग्नानंद ब्रह्मचारी बाबा के मार्गदर्शन में बनवाया था। इतनी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बावजूद न तो इसे संरक्षित स्मारक का दर्जा मिला, न ही किसी सरकारी अभिलेख में इसकी सुध ली गई।
शिकायतें कीं, लेकिन सुनवाई नहीं

ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान से लेकर तहसील और जिला स्तर तक कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन हर बार आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला।
आज मंदिर का नाम आते ही अधिकारी “जांच कराएंगे” कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं। श्रद्धा और राजनीति के बीच फंसा मंदिर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब चुनाव आते हैं तो मंदिरों की याद क्यों आती है?

राम के नाम पर राजनीति तो होती है, लेकिन राम से जुड़े स्थलों की जिम्मेदारी क्यों नहीं? ,अब गांव चाहता है समाधान, भाषण नहीं , ग्रामीणों की मांग है कि— मंदिर का तत्काल जीर्णोद्धार कराया जाए , असामाजिक तत्वों पर कड़ी कार्रवाई हो ,मंदिर को ऐतिहासिक और धार्मिक संरक्षण मिले ,आख़िरी सवाल, अगर गांव के रामलला ही सुरक्षित नहीं हैं, तो भव्य मंदिरों का संदेश गांव तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा?, उच्चखेरा अजई के लोग आज भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि कभी तो कोई आएगा, जो इस खंडहर को फिर से मंदिर बना देगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *