ब्यूरो रिपोर्ट,सीतापुर: विकास खंड पहला क्षेत्र के महम्मदपुर कला गांव में सीखो, सिखाओ फाउंडेशन एवं स्वयंसेवी सदस्यों के सहयोग से आयोजित समर कैंप बच्चों के लिए शिक्षा, संस्कार और मनोरंजन का अनूठा संगम बन गया है। लगभग 115 बच्चों की सक्रिय सहभागिता वाले इस कैंप में विभिन्न रचनात्मक, शैक्षिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास का प्रयास किया जा रहा है।
कैंप में बच्चों को योग एवं ध्यान के माध्यम से मानसिक एकाग्रता और स्वस्थ जीवनशैली की सीख दी जा रही है, वहीं चित्रकला, हस्तशिल्प और मिट्टी से विभिन्न कलात्मक वस्तुएं बनाने जैसी गतिविधियों के जरिए उनकी रचनात्मक क्षमता को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त नाटक, गीत, कविता पाठ और भारतीय भाषाओं में संवाद के माध्यम से बच्चों में अभिव्यक्ति कौशल और आत्मविश्वास का विकास किया जा रहा है।
समर कैंप की एक विशेषता यह भी है कि यहां बच्चों को देश के विभिन्न राज्यों की लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत और लोकनृत्यों से परिचित कराया जा रहा है।
जिससे उनमें “विविधता में एकता” की भावना मजबूत हो सके और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान का भाव विकसित हो। कैंप के संयोजकों ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों में रचनात्मक सोच, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, सहयोग की भावना और सांस्कृतिक मूल्यों का विकास करना है।
उनका कहना है कि बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उन्हें ऐसे मंच उपलब्ध कराना आवश्यक है, जहां वे अपनी छिपी हुई प्रतिभाओं को पहचान सकें और उन्हें निखार सकें।
समर कैंप में भाग ले रहे बच्चों के अभिभावकों ने भी इस प्रयास की सराहना की है। उनका कहना है कि कैंप में शामिल होने के बाद बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ा है, अनुशासन की भावना विकसित हुई है और नई-नई चीजें सीखने के प्रति उत्सुकता में वृद्धि हुई है। बच्चों के व्यवहार और दैनिक गतिविधियों में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में आयोजित यह समर कैंप केवल अवकाश के समय को उपयोगी बनाने का माध्यम नहीं है, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास, सामाजिक सहभागिता और संस्कार निर्माण की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल बनकर उभर रहा है।
शिक्षा के साथ संस्कृति और मानवीय मूल्यों को जोड़ने का यह प्रयास समाज के अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
