ब्यूरो रिपोर्ट,सीतापुर: खैराबाद में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), खैराबाद, सीतापुर परिसर में उस समय भावनात्मक और प्रेरणादायी वातावरण से सराबोर हो गया, जब संस्थान के प्राचार्य डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह के जन्मदिन के अवसर को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए एक विशेष वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्राचार्य की पूज्य माता वीरमति सिंह के कर-कमलों से पारिजात (हरसिंगार) के पौधे का रोपण कर संस्कार, संस्कृति और प्रकृति के समन्वय का सशक्त संदेश दिया गया।
भारतीय संस्कृति में पारिजात वृक्ष को पवित्रता, सुगंध और औषधीय गुणों का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में इसका रोपण केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए पर्यावरणीय चेतना और जीवन मूल्यों के बीजारोपण के रूप में देखा गया। कार्यक्रम के दौरान डायट परिसर पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक गौरव और शैक्षिक दायित्वबोध के भाव से ओतप्रोत नजर आया।
इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए डायट प्राचार्य डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा,
“पारिजात वृक्ष जनपदवासियों को लंबे समय तक अपनी सुगंध और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता रहेगा। यह वृक्ष आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और औषधीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि जीवन के प्रत्येक विशेष अवसर को वृक्षारोपण जैसे कार्यों से जोड़ा जाए, तो समाज में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन संभव है।”
वहीं, कार्यक्रम को भावनात्मक ऊंचाई प्रदान करते हुए वीरमति सिंह ने कहा,
“वृक्ष लगाना पुण्य का कार्य है। वृक्ष बिना किसी भेदभाव के सभी को छाया, फल, फूल और प्राणवायु देता है। मनुष्य को भी निःस्वार्थ भाव से समाज और प्रकृति के कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए। मुझे गर्व है कि मेरे पुत्र ने अपने जन्मदिन को इस लोकमंगलकारी कार्य से जोड़ा।”
कार्यक्रम में संस्थान के प्रवक्तागण एवं कर्मचारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। प्रमुख रूप से मोनिका गौतम, अमित वर्मा, स्नेहलता वर्मा, ईश महान शुक्ल, रुचि सागर, राजेश्वरी वर्मा, डॉ. मीनाक्षी शर्मा, सीमा वर्मा, मनीषा, डॉ. शाह खालिद, डॉ. रश्मि सिरोही, डॉ. नरेंद्र कुमार और दिलीप कुमार सहित वरिष्ठ सहायक जयपाल, कनिष्ठ सहायक रम्भा सिंह एवं शशांक तिवारी उपस्थित रहे।
सभी उपस्थितजनों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे शिक्षा जगत के लिए अनुकरणीय बताया। उनका कहना था कि जब शिक्षक-प्रशिक्षण संस्थान से पर्यावरणीय संवेदनशीलता का संदेश निकलता है, तो उसका प्रभाव समाज के व्यापक स्तर तक पड़ता है।
निस्संदेह, यह आयोजन केवल जन्मदिन समारोह नहीं रहा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, पारिवारिक संस्कार, सांस्कृतिक चेतना और शैक्षिक मूल्यों का एक जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। पारिजात का यह पौधा आने वाले समय में न केवल अपनी सुगंध से परिसर को महकाएगा, बल्कि समाज को यह संदेश भी देगा कि सच्चा विकास प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व से ही संभव
