ब्यूरो रिपोर्ट,सीतापुर: तहसील महमूदाबाद के विकास खंड पहला अंतर्गत ग्राम पंचायत कंडारी के मजरा आजमपुर (सरकौना) में चकमार्ग की पटाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी सीतापुर, उपजिलाधिकारी महमूदाबाद सहित मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि उनकी कृषि भूमि पर गलत तरीके से चकमार्ग निकालकर जेसीबी मशीन से पटाई कराई जा रही है।
पीड़ित राजेंद्र प्रसाद के अनुसार, गाटा संख्या 89 में संबंधित विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के चलते चकमार्ग निर्माण का कार्य शुरू कराया गया। उनका कहना है कि गांव के ही बाबू राम, अशर्फी लाल और मकरंद पुत्रगण राम दयाल की भूमि से चकमार्ग नहीं निकाला गया, जबकि केवल उनकी जमीन को चिह्नित कर वहां जेसीबी मशीन से पटाई कराई जा रही है।
राजेंद्र प्रसाद का आरोप है कि उन्होंने मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को लिखित प्रार्थना पत्र देकर पहले ही दे दी थी, इसके बावजूद कार्य नहीं रोका गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पटाई के दौरान तेजपाल यादव और बलराम यादव द्वारा उनके खेत में लगा आम का पेड़ जेसीबी मशीन से उखाड़ दिया गया। साथ ही खेत में बनी उनके माता-पिता की समाधि को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया, जिससे परिवार की भावनाओं को ठेस पहुंची है।
पीड़ित का कहना है कि वह कई दिनों से न्याय की मांग को लेकर अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और अपनी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की मांग की है।
विपक्षी पक्ष ने आरोपों को बताया निराधार : और वहीं, इस मामले में नामजद किए गए बाबू राम, अशर्फी लाल और मकरंद का कहना है कि चकमार्ग का कार्य राजस्व विभाग की देखरेख में कराया जा रहा है और इसमें उनकी कोई व्यक्तिगत भूमिका नहीं है। उनका कहना है कि प्रशासन द्वारा जो भी सीमांकन और कार्यवाही की जा रही है, वह सरकारी अभिलेखों के आधार पर की जा रही है। उन्होंने पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यदि किसी को आपत्ति है तो वह सक्षम अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख सकता है। और तेजपाल यादव ने भी इस मामले को लेकर बताया कि इस सार्वजनिक चकमार्ग को पटवाए जाने को लेकर पूर्व में मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की थी। जिससे इस चकमार्ग का मरम्मत कार्य शुरू किया गया है। जो कि ग्रामीणों के हित के लिए जरूरी है
लेखपाल ने नापजोख को बताया नियमानुसार : मामले में जब क्षेत्रीय लेखपाल राजकुमार दिनकर से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि संबंधित भूमि की नापजोख नियमानुसार की गई है। उनके अनुसार, राजेंद्र प्रसाद के खेत का जितना वास्तविक रकबा है, उसे सुरक्षित रखते हुए ही चकमार्ग की पटाई कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि राजस्व अभिलेखों और मौके की स्थिति के आधार पर ही कार्रवाई की गई है तथा किसी प्रकार की अनियमितता नहीं बरती गई है।
हालांकि, पीड़ित लेखपाल के इस दावे से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि नापजोख में गंभीर त्रुटियां की गई हैं और उच्च अधिकारियों द्वारा पुनः जांच कराए जाने पर सच्चाई सामने आ जाएगी।
उच्च स्तरीय जांच की मांग : इस पूरे मामले को लेकर गांव में चर्चा का माहौल बना हुआ है। एक ओर पीड़ित अपनी भूमि पर जबरन चकमार्ग निकाले जाने और नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्षी पक्ष और राजस्व विभाग की ओर से कार्रवाई को नियमों के अनुरूप बताया जा रहा है।
अब यह मामला प्रशासनिक जांच का विषय बन गया है। ऐसे में यह आवश्यक है कि उच्च अधिकारी मौके पर पहुंचकर निष्पक्ष जांच कराएं, राजस्व अभिलेखों का सत्यापन करें और सभी पक्षों को सुनने के बाद उचित निर्णय लें, ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो और ग्रामीण क्षेत्र में व्याप्त विवाद का समाधान हो सके।
