त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव: पारदर्शिता, सामाजिक न्याय और समयबद्धता पर जोर

ब्यूरो रिपोर्ट,सीतापुर : उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच भाजपा अटरिया मंडल के महामंत्री व जिला सलाहकार समिति सदस्य सौरभ गुप्ता ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पारदर्शिता, सामाजिक न्याय और संवैधानिक मर्यादा को सर्वोपरि बताया है।

सौरभ गुप्ता ने कहा कि भारत के लोकतंत्र की वास्तविक ताकत गांवों में बसती है और ग्राम पंचायतें ग्रामीण विकास की आधारशिला हैं। ऐसे में पंचायत चुनाव केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के भविष्य को दिशा देने वाला महत्वपूर्ण अवसर है।

उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग के गठन और आरक्षण निर्धारण प्रक्रिया को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह कदम सामाजिक न्याय की दिशा में सकारात्मक पहल है। उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ‘ट्रिपल टेस्ट’ के आधार पर आरक्षण तय किया जाना एक मजबूत और विवादमुक्त व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।

उन्होंने मांग की कि आयोग की रिपोर्ट और आरक्षण सूची को पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक किया जाए, ताकि आम जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हो।
समयबद्ध चुनाव की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद विकास कार्यों पर असर पड़ता है। ऐसे में जल्द से जल्द चुनाव प्रक्रिया पूरी कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए, ताकि गांवों में विकास की गति बनी रहे।

उन्होंने ‘अंत्योदय’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के लिए पिछड़े, दलित और वंचित वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिलना जरूरी है। नियमों के अनुरूप आरक्षण लागू करने से चुनाव प्रक्रिया अधिक समावेशी और निष्पक्ष बनेगी।
अंत में सौरभ गुप्ता ने उम्मीद जताई कि सरकार पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों के आधार पर शीघ्र आरक्षण अधिसूचना जारी करेगी और पारदर्शी व्यवस्था के साथ पंचायत चुनाव सम्पन्न कराएगी।

उनका कहना है कि मजबूत कानून व्यवस्था और स्पष्ट आरक्षण नीति से यह चुनाव न केवल विवादमुक्त होंगे, बल्कि ग्रामीण भारत में सामाजिक समरसता और विकास का नया अध्याय भी लिखेंगे।

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