सीतापुर में कथित धर्मांतरण नेटवर्क का भंडाफोड़, चार आरोपी गिरफ्तार, भारी मात्रा में धार्मिक साहित्य और मोबाइल बरामद

ब्यूरो रिपोर्ट सीतापुर: जनपद में थाना मिश्रिख पुलिस ने कथित रूप से आर्थिक रूप से कमजोर, अशिक्षित एवं अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने वाले एक संगठित नेटवर्क का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार यह नेटवर्क कई वर्षों से सक्रिय था और विभिन्न जिलों में अपने स्थानीय संचालकों तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से गतिविधियों का संचालन कर रहा था।

 

पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल के निर्देश पर गंभीर अपराधों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। अभियान की निगरानी अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी दुर्गेश कुमार सिंह द्वारा की गई, जबकि क्षेत्राधिकारी मिश्रिख बृजेश कुमार के नेतृत्व में थाना मिश्रिख पुलिस ने कार्रवाई को अंजाम दिया।

 

पुलिस के अनुसार थाना मिश्रिख में दर्ज मुकदमा संख्या 126/2026, धारा 127(2), 302 भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) तथा उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम-2021 की धारा 3 एवं 5(1) के तहत पूर्व में सुरेंद्र कुमार सिंह उर्फ सुरेंद्र मसीह उर्फ फादर को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जा चुका है। मामले की विवेचना के दौरान मिले साक्ष्यों और सूचनाओं के आधार पर अन्य आरोपियों की तलाश जारी थी।

 

हरगांव से शुरू हुई कार्रवाई, खीरी तक पहुंची पुलिस : पुलिस को मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर सबसे पहले हरगांव क्षेत्र से सुरेश चंद्र को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में मिली जानकारी और निशानदेही के आधार पर पुलिस टीम ने तत्काल जनपद लखीमपुर खीरी के रामापुर, सुंदरवल और भीरा क्षेत्रों में ताबड़तोड़ दबिश दी। कार्रवाई के दौरान नेटवर्क से जुड़े तीन अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

 

गिरफ्तार आरोपियों में सुरेश चंद्र निवासी हरगांव (सीतापुर), कमलेश कुमार निवासी रामापुर (खीरी), श्रवण कुमार निवासी सुंदरवल (खीरी) तथा अरुण एशुदाशन निवासी भीरा (खीरी) शामिल हैं। पुलिस के अनुसार सभी आरोपी स्थानीय स्तर पर मिशन की गतिविधियों का संचालन करते थे तथा सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जोड़ने का कार्य करते थे।

 

वर्ष 2002 से मिशन से जुड़े होने की जानकारी : पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे वर्ष 2002 से “सेंट्रल यूपी मिशन” नामक मिशनरी संगठन से जुड़े हुए हैं। जांच में यह जानकारी सामने आई है कि संगठन का संचालन कानपुर से जोनाथन जोशुआ उर्फ जॉनी सर द्वारा किया जाता है। पुलिस के अनुसार संगठन के माध्यम से विभिन्न जिलों में कार्यरत लोगों को धर्म प्रचार-प्रसार के लिए आर्थिक सहायता और साहित्य उपलब्ध कराया जाता था।

 

प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप : पुलिस का दावा है कि आरोपी आर्थिक रूप से कमजोर और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग के लोगों को निशाना बनाते थे। उन्हें मुफ्त धार्मिक पुस्तकें, प्रचार सामग्री तथा अन्य प्रकार के प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जाता था।

 

जांच में यह भी सामने आया कि हरगांव स्थित एक आरोपी के घर पर कथित रूप से अवैध रूप से चर्च संचालित किया जा रहा था, जहां प्रत्येक रविवार को प्रार्थना सभा आयोजित होती थी। इसके अलावा मिश्रिख क्षेत्र में पूर्व में गिरफ्तार आरोपी के घर पर भी प्रत्यक्ष और वीडियो कॉल के माध्यम से प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाती थीं।

 

मोबाइल फोन और व्हाट्सएप ग्रुप से मिले अहम सुराग : पुलिस द्वारा बरामद किए गए मोबाइल फोन की जांच में “सेंट्रल यूपी मिशन” नामक व्हाट्सएप ग्रुप के संचालन तथा संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई डिजिटल साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है। इन साक्ष्यों की साइबर सेल की मदद से विस्तृत जांच कराई जा रही है।

 

भारी मात्रा में धार्मिक साहित्य बरामद : कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कुल 529 धार्मिक एवं प्रचार संबंधी पुस्तकें तथा 151 पंपलेट बरामद किए हैं। बरामद सामग्री में “प्यार का उपहार”, “एक जिंदगी एक मिले”, “प्रभु की अनमोल सहायता”, “मसीही के लिए सताए गए”, “पवित्र शास्त्र”, “बाइबिल” तथा “तुम्हें शक्ति मिले” शीर्षक की पुस्तकें और पंपलेट शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त रियलमी, टेक्नो स्पार्क, वीवो वाई-31 और सैमसंग गैलेक्सी एस-20 सहित चार स्मार्टफोन भी बरामद किए गए हैं, जिन्हें तकनीकी और साइबर परीक्षण के लिए सील कर दिया गया है।

 

इन पुलिसकर्मियों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका : इस कार्रवाई में थाना मिश्रिख प्रभारी निरीक्षक प्रदीप कुमार सिंह, निरीक्षक अपराध श्याम दास वर्मा, उपनिरीक्षक शिवम सिंह, उपनिरीक्षक अरुण कुमार शर्मा, मुख्य आरक्षी विनय सिंह तथा महिला आरक्षी पूजा सिंह सहित पुलिस टीम के अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

पुलिस ने गिरफ्तार सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया है। मामले की विवेचना जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आ

धार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

 

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