ब्यूरो रिपोर्ट लखनऊ: नई दिल्ली में लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर 28 जून 2026 से आमरण अनशन (भूख हड़ताल) शुरू किया। इस बार उनका आंदोलन मुख्य रूप से देश की शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, छात्रों के भविष्य और जवाबदेही की मांग को लेकर है।
आंदोलन क्यों शुरू किया गया? : सोनम वांगचुक ने आरोप लगाया कि देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक होने से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का समर्थन करते हुए अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया। यह आंदोलन युवाओं के एक अभियान के साथ मिलकर चल रहा है, जिसने परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही की मांग उठाई है।
आंदोलन कैसे आगे बढ़ा?: जंतर-मंतर पर शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों, कलाकारों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने वांगचुक से मुलाकात कर समर्थन जताया। हालांकि केंद्र सरकार ने आंदोलन की मांगों पर कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया।
स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता गया: लगातार भूख हड़ताल के कारण सोनम वांगचुक का वजन तेजी से घटा। डॉक्टरों ने बताया कि उनके शरीर में पानी और पोटैशियम की कमी, बढ़ते कीटोन स्तर और अन्य चिकित्सीय संकेत गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर रहे थे। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी सरकार को उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए और कहा कि प्रत्येक नागरिक का जीवन महत्वपूर्ण है।
अस्पताल ले जाने पर विवाद : 18 जुलाई 2026 को अनशन के 21वें दिन दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई। प्रशासन का कहना था कि यह कदम डॉक्टरों की सलाह और अदालत के निर्देशों के अनुरूप उनकी जान बचाने के लिए उठाया गया, जबकि समर्थकों ने इसे जबरन कार्रवाई बताया। इस घटना के बाद आंदोलन और तेज हो गया तथा समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा की।
अब तक की स्थिति: सोनम वांगचुक फिलहाल चिकित्सकीय निगरानी में हैं। अस्पताल से उन्होंने समर्थकों से आंदोलन जारी रखने और 20 जुलाई को प्रस्तावित “चलो संसद” मार्च में भाग लेने की अपील की है। उनकी पत्नी ने भी उपचार को लेकर चिंता जताते हुए उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग दिल्ली हाईकोर्ट में उठाई है।
निष्कर्ष : सोनम वांगचुक का यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति का अनशन नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार और युवाओं के भविष्य को लेकर उठी एक बड़ी राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया है। आंदोलन के दौरान उनकी बिगड़ती सेहत, अदालत की दखल, पुलिस की कार्रवाई और बढ़ता जनसमर्थन इसे देश के प्रमुख आंदोलनों में शामिल कर रहा है।
