ब्यूरो रिपोर्ट,सीतापुर : थाना महमूदाबाद क्षेत्र के ग्राम सिरौली में गुरुवार शाम लगभग 5 बजे निकाली गई पारंपरिक गागर यात्रा ने एक बार फिर क्षेत्र में हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश की। सिरौली गांव से प्रारंभ हुई यह यात्रा सिरौली चौराहे पर स्थित शाहिद मर्द बाबा की मजार तक पहुंची, जहां अकीदतमंदों ने चादर चढ़ाकर फातिहा पढ़ी और अमन-चैन की दुआ मांगी।
यह गागर यात्रा गांव के विभिन्न मार्गों से होते हुए जिन्नात मजार, शाहिद मर्द मजार, सिरौली-सदरावां मार्ग पर स्थित बड़ी मजार तथा अलीनगर गांव में स्थित छोटे बाबा की मजार तक पहुंची। हर स्थान पर श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धा भाव से मत्था टेककर मजारों की रहमत और बरकत हासिल की। मान्यता है कि इन दरगाहों पर सच्चे दिल से मांगी गई मुरादें पूरी होती हैं और लोगों के दुख-दर्द दूर होते हैं।
कार्यक्रम का आयोजन सिरौली निवासी कलीम पुत्र सलीम द्वारा किया गया, जिनके इस प्रयास को गांव के सभी समुदायों का भरपूर सहयोग मिला। स्थानीय लोगों—मो. उस्मान, मो. शमीम, खलील अहमद, रहमत अली, आदिल, पप्पू, लल्लन आदि—ने बताया कि यह परंपरा लगभग 40 वर्षों से निरंतर चली आ रही है, जिसमें हर धर्म और वर्ग के लोग बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं।
गागर यात्रा के दौरान एक खास बात यह देखने को मिली कि इसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग एक साथ शामिल होकर आस्था का परिचय देते हैं। मजारों पर चादर चढ़ाने से लेकर प्रसाद वितरण तक, हर चरण में आपसी सौहार्द और भाईचारे की झलक साफ दिखाई दी। लोगों का मानना है कि इन मजारों की रूहानी ताकतें क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि और एकता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।
कार्यक्रम के समापन पर प्रसाद वितरण किया गया, जिसे सभी समुदाय के लोगों ने एक साथ बैठकर ग्रहण किया। इस दौरान महबूब अली, नसरुद्दीन, नियाज़ अली, अशरफ अली उर्फ गुड्डू भाई समेत क्षेत्र के कई सम्मानित गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
यह गागर यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक समरसता और गंगा-जमुनी तहजीब की जीवंत मिसाल भी है, जो आज के समय में समाज को एकजुट रखने का संदेश देती है।
