ब्यूरो रिपोर्ट,सीतापुर: महमूदाबाद में जिला पंचायत अध्यक्ष का प्रतिष्ठित पद भारतीय जनता पार्टी को अब तक तीन बार प्राप्त होने का अवसर मिला है। इन तीनों कार्यकालों की समीक्षा करने पर यह स्पष्ट रूप से सामने आता है कि प्रथम कार्यकाल, जो स्वर्गीय महेंद्र सिंह वर्मा के नेतृत्व में रहा, विकास के लिहाज से सबसे सफल और ऐतिहासिक रहा। स्वर्गीय महेंद्र सिंह वर्मा के कार्यकाल में कराए गए विकास कार्यों का रिकॉर्ड आज तक कोई भी ध्वस्त नहीं कर सका है। भाजपा की सरकार के दौरान मिले इस कार्यकाल में महमूदाबाद क्षेत्र की शायद ही कोई सड़क या खड़ंजा विकास से अछूता रहा हो। रामपुर मथुरा रोड पर जिला पंचायत की भूमि को दीर्घकालीन लीज पर देकर कई दर्जन दुकानों का निर्माण कराया गया, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिला। इसके साथ ही जिला पंचायत गेस्ट हाउस का निर्माण तथा रामकुंड चौराहे की कायापलट कर उसे भव्य स्वरूप देने में भी जिला पंचायत का अहम योगदान रहा। जमीनी विकास के साथ-साथ स्वर्गीय वर्मा ने व्यक्तित्व और नेतृत्व विकास की दिशा में भी अनोखी पहल की। उनके कार्यकाल में कई दर्जन युवाओं को ठेकेदारी के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया गया। इसके बाद महमूदाबाद को लगातार दो कार्यकाल और मिले, लेकिन इन कार्यकालों में न तो ठोस जमीनी विकास दिखाई दिया और न ही कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने की कोई ठोस पहल सामने आई। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जब करोड़ों रुपये खर्च कर चुनाव जीता जाता है, तब आम कार्यकर्ताओं और जनता को महत्व देने की भावना कमजोर हो जाती है। धनबल के सहारे पार्टी, संगठन और भीड़ को मैनेज करना आसान हो जाता है, ऐसे में जमीनी लोकप्रियता और कार्यकर्ताओं की भूमिका गौण हो जाती है। बड़े पदाधिकारियों को महंगे उपहार देना प्राथमिकता बन जाती है, जबकि निचले स्तर के कार्यकर्ताओं पर खर्च को गैर-जरूरी समझा जाता है। इसी बीच मौजूदा सरकार द्वारा जिला पंचायत जैसे पदों पर प्रत्यक्ष चुनाव कराए जाने की घोषणा ने ऐसे लोगों को असहज कर दिया है। यह फैसला उन नेताओं के लिए राहत और खुशी की खबर है, जिनकी जनता के बीच वास्तविक लोकप्रियता है, जबकि धनबल के सहारे पद हासिल करने वालों के लिए यह निर्णय भविष्य में बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
