जानिए कैसे बना ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’, जनसंघ से भाजपा तक की विचारधारा का प्रतीक

  • ब्यूरो रिपोर्ट लखनऊ : उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में  भाजपा सरकार के गठन के बाद राज्य के प्रमुख नेताओं और महापुरुषों की स्मृति में स्मारक व पार्क विकसित करने की परिकल्पना सामने आई। इसी क्रम में राजधानी लखनऊ में जनसंघ के संस्थापक नेताओं की स्मृति को सहेजने और नई पीढ़ी को राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रेरित करने के उद्देश्य से ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ का निर्माण किया गया।
    भाजपा नेतृत्व का मानना था कि लखनऊ में जनसंघ के संस्थापक सदस्यों की स्मृति में एक भव्य और प्रेरणादायक स्थल होना चाहिए, जो देश और प्रदेश के लोगों को राष्ट्रसेवा के मूल्यों से जोड़ सके। इसी सोच के तहत इस स्थल को विकसित किया गया।
    प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के अनुसार, राष्ट्र प्रेरणा स्थल की अवधारणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की है। उन्होंने बताया कि करीब छह वर्ष पूर्व हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में यह विचार सामने आया कि लखनऊ अटल बिहारी वाजपेयी की कर्मभूमि रहा है और उनका इस शहर से गहरा भावनात्मक जुड़ाव रहा है। ऐसे में अटल जी की स्मृति को चिरस्थायी रूप देने के लिए राजधानी में एक विशेष स्थल विकसित किया जाना चाहिए।
    स्वतंत्र देव सिंह ने बताया कि प्रारंभिक रूप से केवल अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा स्थापित करने का विचार था, लेकिन बाद में यह निर्णय लिया गया कि भाजपा की वैचारिक जड़ों को दर्शाने के लिए जनसंघ के संस्थापक नेताओं को भी सम्मान दिया जाए। इसी कारण राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय की भव्य प्रतिमाएं भी स्थापित की गईं।
    आज राष्ट्र प्रेरणा स्थल न केवल अटल बिहारी वाजपेयी, बल्कि जनसंघ से भाजपा तक की वैचारिक यात्रा का जीवंत प्रतीक बन चुका है, जो राष्ट्रवाद, सेवा और समर्पण के मूल्यों को जनमानस तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है।

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