ब्यूरो,रिपोर्ट सीतापुर: महमूदाबाद नगर में स्थित सीता इंटर कालेज के विशाल प्रांगण में आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में जहां एक ओर प्रसिद्ध कवियों ने अपनी प्रखर राष्ट्रभक्ति पूर्ण रचनाओं से देशभक्ति की सरिता बहाई वहीं हास्य, व्यंग की रचनाओं से श्रोताओं को लोटपोट कर दिया। राष्ट्रवादी कवि महेंद्र कुमार शास्त्री सरल के जन्मदिन की स्मृति में 25 अक्टूबर को आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का शुभारंभ विधानसभा कुर्सी विधायक साकेंद्र प्रताप वर्मा व आकाश मौर्य ने दीप प्रज्ज्वलन तथा मां सरस्वती, शास्त्री जी, विद्यालय के संरक्षक स्व. लक्ष्मीकांत रस्तोगी व सीता रस्तोगी की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण करके किया। कवि सम्मेलन में काव्यपाठ करने आये कवियों को स्मृति चिन्ह, चूनर व उत्तरीय भेंटकर सम्मानित किया गया।
कवि सम्मेलन बाबा महाकाल की नगरी मध्य प्रदेश के उज्जैन से पधारे ओज एवं शौर्य के प्रसिद्ध हस्ताक्षर महेंद्र मधुर की वाणी वंदना से शुरू हुआ। उन्होंने कविता पाठ करते हुए गो हत्यारों के लिये पढ़ा कि ‘सरकारी मेहमान बनाकर मत रखो तहखाने में, गाय काटने वालों के अब हाथ काट दो थाने में। उन्होंने पढ़ा कि ‘कहां किसको कभी गुजरी कहानी याद रहती है, न राजा याद रहता है न रानी याद रहती है। मोहब्बत में ही ताकत है जो दुनिया को अमर कर दे, हमें सदियों तलक मीरा दीवानी याद रहती है। श्री कृष्ण की नगरी मथुरा से पधारे अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ओज व शौर्य के प्रसिद्ध कवि मनवीर मधुर ने ‘राम कृपा यदि हो जाये तो, हृदय पुष्प खिल जाता है। घोर कष्ट भी हो जीवन में, वो हंसकर झिल जाता है। पूरे मन से चाहा हो तो, फिर दुश्मन का देश सही। राम भक्त को लंका में भी, राम भक्त मिल जाता है‘ सुनाकर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। श्रोताओं को गुदगुदाते हुए कवि सम्मेलन का सफल संचालन कर रहे बाराबंकी से पधारे हास्य के हाहाहूती कवि विकास बौखल ने पढ़ा कि ‘किसी खंजर से न तलवार से जोड़ा जाए, सारी दुनिया को चलो प्यार से जोड़ा जाए। ये किसी शख्स को दोबारा न मिलने पाए, प्यार के रोग को आधार से जोड़ा जाए। देश के जाने-माने गीतकार लखीमपुर से पधारे ज्ञान प्रकाश आकुल ने पढ़ा कि ‘चांदी सोना एक तरफ, तेरा होना एक तरफ। एक तरफ आंखें तेरी, जादू टोना एक तरफ। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे ओज व शौर्य के प्रसिद्ध हस्ताक्षर बाराबंकी से पधारे रामकिशोर तिवारी किशोर ने ‘तुम स्वयं अपना दीपक जलाओ सखे, सो गई चेतना को जगाओ सखे। रोशनी खुद तुम्हें देखने आएगी, यह निराशा की चादर हटाओ सखे‘ सुनाकर लोगों को सोचने पर मजबूर किया। वागीश दिनकर ने पढ़ा कि ‘सपने सारे सुहाने तुम्हारे लिए, जादू टोनंे कराएं तुम्हारे लिए। एक सदी सा लगा एक दिन प्रेम का, फिर भी हम काट लाए तुम्हारे लिए। प्रसिद्ध गीतकार विनोद गुप्त ने पढ़ा की ‘सुंदर लिखो पृष्ठ रंग डालो, कविता की पुस्तक छपवा लो। कविता पाठ करते हुए अनिल गुप्त ज्योति ने पढ़ा कि ‘भारत की पावन धरती पर, देखो फिर से गूंजा शंखनाद। मृत्युंजय वाजपेयी ने भी कविता पाठ किया। कार्यक्रम में पधारी शास्त्री जी धर्मपत्नी कृष्णा वाजपेयी के साथ अतिथियों व सभी कवियों को सीता गु्रप, महाकाल सेवा समिति व विधायक आशा मौर्य द्वारा स्मृति चिन्ह, चूनर व उत्तरीय भेंटकर स्वागत किया गया। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, राजनैतिक, शैक्षिक संस्थाओं से जुड़े सम्भ्रांत लोगों के साथ हजारों श्रोता देर रात तक दो चक्र में चले कवि सम्मेलन का आंनद लेते रहे। आभार प्रदर्शन संस्था के डिप्टी मैनेजर वागीश दिनकर वाजपेयी ने किया। इस अवसर पर राजाराम यादव, अशोक कुमार, रेउसा ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि अवधेश चौहान, पंकज सिंह गौर, राम कुमार गिरि, दिनेश पांडेय, छोटेलाल मिश्र, भूपेंद्र दीक्षित, डा. रामू मौर्य, राम प्रवेश प्रजापति, संतोष सिंह, आराध्य शुक्ल, देवेंद्र सिंह, केके सिंह, आरजे वर्मा, शशांक शेखर वर्मा, सुरेश वर्मा, चक्रसुदर्शन पांडेय, अतुल वर्मा, आशाराम रस्तोगी, दिनेश वर्मा, मनोज शुक्ल, हरिओम गुप्त, विजय सिंह तोमर, सत्यनारायण पोरवाल, सीपी तिवारी, राम प्रकाश प्रजापति, बच्चा सिंह, डा. महाराज सिंह, सतीश शुक्ल, मुकुंद तिवारी, ज्ञानेश मिश्र, शिवदास पुरवार, अशेष ईशान वाजपेयी, उमाशंकर वर्मा, मोहन प्रसाद बारी, डॉ रजनीश मिश्र सहित बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।
