जनपद सीतापुर के विकास खंड पहला की ग्राम पंचायत दरियापुर अंतर्गत बहेरवा गांव के पास लाखों रुपये की लागत से निर्मित एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र आज बदहाली का शिकार हो चुका है। ग्राम प्रधान सीता सिंह और ग्राम सचिव जय सिंह द्वारा इस केंद्र का निर्माण स्वच्छता मिशन के अंतर्गत कराया गया था, जिसका उद्देश्य था गांवों में ठोस कचरे के वैज्ञानिक निपटान को सुनिश्चित करना।
लेकिन आज यह केंद्र अपनी उपयोगिता से कोसों दूर है। चारों ओर झाड़ियाँ और जंगली घास उग आई हैं, जिससे न केवल केंद्र की दुर्दशा उजागर होती है, बल्कि यह विकास के नाम पर खर्च की गई बड़ी राशि पर भी सवाल खड़े करती है। इस केंद्र तक पहुंचने वाला रास्ता भी पूरी तरह झाड़ियों से घिर चुका है, जिससे ग्रामीणों का आना-जाना मुश्किल हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण के कुछ समय बाद से ही यह केंद्र निष्क्रिय पड़ा है। कोई नियमित साफ-सफाई या संचालन नहीं हो रहा है। जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं, और किसी प्रकार की निगरानी या रख-रखाव की व्यवस्था नहीं है।
ग्रामीणों में रोष, जिम्मेदारों से जवाब की मांग
बहेरवा और आसपास के गांवों के निवासियों में इस उपेक्षा को लेकर भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब लाखों रुपये खर्च कर कोई सुविधा बनाई जाती है, तो उसकी नियमित निगरानी और संचालन भी उतना ही जरूरी है। लेकिन यहां निर्माण के बाद से ही जिम्मेदारों ने मुंह फेर लिया है।
क्या कहता है शासन?
सरकार की योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन को मजबूत करना है। लेकिन यदि बनाए गए संसाधनों की इस तरह अनदेखी की जाए, तो योजना की मूल भावना ही व्यर्थ हो जाती है। यह मामला कहीं न कहीं जनधन के दुरुपयोग और प्रशासनिक लापरवाही की ओर भी इशारा करता है।
मांग उठी: हो जांच और पुनः संचालन
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से इस मामले की जांच कराने और केंद्र को फिर से सक्रिय करने की मांग की है। साथ ही, संबंधित ग्राम प्रधान और सचिव की भूमिका पर भी प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
यदि इस केंद्र को पुनर्जीवित नहीं किया गया, तो यह न केवल शासन की योजनाओं को ठेंगा दिखाने जैसा होगा, बल्कि ग्रामीणों की स्वच्छता संबंधी जरूरतों की अनदेखी भी।
