नेत्रदान बनी परंपरा, 272वां नेत्रदान कर रचा गया मानवता का उदाहरण

ब्यूरो रिपोर्ट सीतापुर: बिसवां में “नेत्रदान बने परंपरा, यह संदेश हमारा है” — इस प्रेरक नारे के साथ सक्षम संस्था द्वारा सीतापुर जनपद में वर्षों पूर्व डाली गई नेत्रदान की नींव आज एक सशक्त वृक्ष का रूप ले चुकी है। इसी का परिणाम है कि लगातार लोग जाते-जाते नेत्रदान कर नेत्रहीनों के जीवन में उजाला बिखेर रहे हैं।
इसी क्रम में बिसवां निवासी अन्नपूर्णा अग्रवाल (उम्र 62 वर्ष), पत्नी अशोक कुमार अग्रवाल के निधन के उपरांत उनके पुत्र अनुराग, अनुपम एवं आरती अग्रवाल ने परोपकार की मिसाल पेश करते हुए नेत्रदान करवाया।
सक्षम संस्था के जिला मीडिया प्रभारी विकास अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि बिसवां के समाजसेवी अमरनाथ मल्होत्रा द्वारा रात्रि करीब 12 बजे सूचना दी गई, जिसके बाद आंख अस्पताल सीतापुर की टीम तत्परता से बिसवां स्थित उनके निवास पर पहुंची। टीम में अरुणेश मिश्रा, डॉ. श्रुति सक्सैना, डॉ. नीलम कुमारी एवं प्रिया शामिल रहीं, जिन्होंने एक छोटे से ऑपरेशन के माध्यम से नेत्रों को सुरक्षित कर आई बैंक सीतापुर में संरक्षित किया। यह नेत्र दो नेत्रहीन व्यक्तियों को निःशुल्क प्रत्यारोपित किए जाएंगे, जिससे वे पुनः इस रंगीन दुनिया को देख सकेंगे।

संस्था के महामंत्री मुकेश अग्रवाल ने शोक की इस घड़ी में भी परिजनों द्वारा किए गए इस महान दान के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि परोपकार की भावना से किया गया यह दान सर्वश्रेष्ठ दान है। और वहीं संस्था अध्यक्ष संदीप भरतिया ने कहा कि नेत्रदान ऐसा उपहार है, जो व्यक्ति की अनुपस्थिति में भी किसी और के जीवन में रंग भर देता है और जीवन को सार्थक बना देता है। संस्था के सुभाष अग्निहोत्री ने कहा कि किसी के जीवन में रोशनी लौटाना अमूल्य तोहफा है, धन्य हैं वे लोग जो जाते-जाते अपने नेत्रों का दान कर जाते हैं। अक्षत अग्रवाल ने बताया कि सक्षम संस्था द्वारा अब तक 272वां नेत्रदान सम्पन्न कराया जा चुका है, जो संस्था की निरंतर सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

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