ब्यूरो रिपोर्ट,लखनऊ : उत्तर प्रदेश के स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग से जुड़ी एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक खबर सामने आई है। महानिरीक्षक निबन्धन (आईजी रजिस्ट्रेशन) नेहा शर्मा द्वारा ई-पंजीकरण (ऑनलाइन रजिस्ट्री) से संबंधित पूर्व में जारी एक महत्वपूर्ण आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया गया है। इस संबंध में प्रदेश के सभी सहायक महानिरीक्षक निबन्धन, जिलाधिकारियों तथा उप-निबंधकों को आधिकारिक पत्र जारी कर आवश्यक जानकारी दे दी गई है।
क्या था पूर्व आदेश? : महानिरीक्षक निबन्धन कार्यालय की ओर से 4 जून 2026 को पत्र संख्या-2523/ई-पंजीकरण जारी किया गया था। यह आदेश उत्तर प्रदेश ऑनलाइन दस्तावेज रजिस्ट्रीकरण नियमावली-2024 के नियम-5 के अंतर्गत कुछ चिन्हित संस्थाओं द्वारा निष्पादित दस्तावेजों के ई-पंजीकरण (ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन) की व्यवस्था से संबंधित था।
इस आदेश के जरिए चयनित संस्थाओं के दस्तावेजों को ऑनलाइन माध्यम से पंजीकृत करने की प्रक्रिया को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया था।
सम्यक विचार के बाद लिया गया फैसला : हालांकि, 29 जून 2026 को जारी नए आदेश में महानिरीक्षक निबन्धन ने स्पष्ट किया है कि मामले पर सम्यक विचार और समीक्षा के उपरांत 4 जून 2026 को जारी उक्त परिपत्र को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जा रहा है। इसके साथ ही पूर्व में जारी निर्देश अब प्रभावी नहीं रहेंगे।
विभाग और वकीलों के बीच बढ़ी चर्चा : विभाग के इस अचानक निर्णय के बाद रजिस्ट्री कार्यालयों, अधिवक्ताओं तथा संबंधित संस्थाओं के बीच विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सभी की निगाहें शासन और निबन्धन विभाग द्वारा जारी किए जाने वाले नए दिशा-निर्देशों पर टिकी हुई हैं।
नई व्यवस्था के इंतजार में विभाग : विशेषज्ञों का मानना है कि ई-रजिस्ट्री व्यवस्था को लेकर भविष्य में कोई नई रूपरेखा या संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। फिलहाल, विभाग द्वारा पूर्व आदेश वापस लेने के बाद संबंधित कार्यालयों को वर्तमान में लागू नियमों और व्यवस्थाओं के अनुसार कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह फैसला प्रदेश में डिजिटल रजिस्ट्री व्यवस्था के क्रियान्वयन और उसकी प्रक्रियाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
