ब्यूरो रिपोर्ट, सीतापुर: महमूदाबाद नगर क्षेत्र में प्रसिद्ध माँ संकटा देवी मंदिर में वर्ष 2026 का वार्षिक मेला 19 मार्च से 17 अप्रैल तक पूरे श्रद्धा, उत्साह और भव्यता के साथ आयोजित किया जाएगा। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाला यह मेला एक माह तक आस्था, संस्कृति और मनोरंजन का केंद्र बना रहेगा, जिसमें दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
मेले का शुभारंभ 19 मार्च, गुरुवार की शाम क्षेत्रीय विधायक आशा मौर्य द्वारा किया जाएगा। उद्घाटन अवसर पर ध्वज पूजन के साथ कार्यक्रमों की श्रृंखला की शुरुआत होगी। आयोजन समिति ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी मेले में पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालुओं के लिए झूले, दुकानों और विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों की विशेष व्यवस्था की गई है, जिससे मेले का आकर्षण और बढ़ेगा।
मेले के दौरान 19 मार्च से 2 अप्रैल तक प्रतिदिन शाम 7 बजे माँ संकटा देवी की भव्य महाआरती आयोजित की जाएगी। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। महाआरती के समय पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठेगा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजेगी हर शाम मेले को और आकर्षक बनाने के लिए विभिन्न तिथियों पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है, जो प्रतिदिन रात्रि 8 बजे से शुरू होंगे।
कार्यक्रमों की रूपरेखा इस प्रकार है 19 मार्च: उद्घाटन, ध्वज पूजन एवं भाव नृत्य प्रतियोगिता सेमीफाइनल , 27 मार्च: रामनवमी उत्सव, 28 मार्च: कवि सम्मेलन, 29 मार्च: टैलेंट शो, 30 मार्च: गजानन पार्टी द्वारा भव्य झांकियों की प्रस्तुति, 31 मार्च: बाल कवि सम्मेलन, 1 अप्रैल: भाव नृत्य प्रतियोगिता फाइनल, 2 अप्रैल: आल्हा गायन, पुरस्कार वितरण एवं आतिशबाजी।
इन कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलेगा, साथ ही दर्शकों को भी विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लेने का अवसर प्राप्त होगा। मेला समिति के अध्यक्ष रमेश बाजपेयी ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे परिवार सहित मेले में पहुंचकर माँ संकटा देवी के दर्शन करें और धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भरपूर आनंद उठाएं।
प्रशासन और मेला समिति द्वारा सुरक्षा, साफ-सफाई और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का भी महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
